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Importance of the Gita

भगवद्गीता को मानवीय परिवर्तन का एक महान उपकरण माना गया है, जो धार्मिक सहिष्णुता और विश्व शांति के लिए भी सहायक है. कुछ महान वैज्ञानिकों और चिंतकों के गीता विषयक विचारों से हमें परिचित होना चाहिए, जो हमें यह भी बतायेंगे कि क्यों हमें सम्पूर्ण मानवीय विकास और सम्पूर्ण ग्रामीण विकास में इस पुस्तक की मदद लेनी चाहिए.  यह पुस्तक वह परिवर्तन और विकास आसन कर देगी. 

 

अलबर्ट आइन्सटाइन, महान वैज्ञानिक—“जब मैं भगवद्-गीता पढ़ता हूँ, और ब्रह्मांड की सृष्टि ईश्वर ने कैसे की, भगवद्-गीता के इस सिद्धांत पर चिंतन करता हूँ, तो बाकी सबकुछ अत्यंत सतही और तुच्छ लगने लगता है।"


आलडस हक्सले, प्रसिद्ध लेखक—“भगवद्-गीता मनुष्य के आध्यात्मिक उद्विकास का सबसे व्यवस्थित कथन है, जिसका मानव-मात्र के लिए स्थायी मूल्य है। अबतक मनुष्य के लिए ईश्वर द्वारा प्रकट किए गए  सर्वाधिक चिरंतन महत्त्व के सिद्धांतों का सबसे स्पष्ट और सर्वांगपूर्ण सारांश है भगवद्-गीता।" 

हेनरी डेविड थोरू, महान अमरीकी लेखक और कवि (1817-62)—“मैं रोज सुबह अपनी बुद्धि को भगवद्-गीता के विलक्षण और वैश्विक  दर्शन में स्नान कराता हूँ—उस दर्शन में जिसके समक्ष हमारी आधुनिक दुनिया और उसका साहित्य अदना और तुच्छ प्रतीत होते हैं।" 


हर्मन हेस, नोबेल-लौरिएट जर्मन लेखक और चित्रकार (1877-1962)—"भगवद्-गीता में जीवन के ज्ञान-विवेक का जो अचंभित कर देने वाला सत्य-प्रकटीकरण है, वह जीवन-दर्शन एक धर्म के रूप में पुष्पित-पल्लवित हो उठता है।"  

हर्मन ग्राफ कीसर्लिंग, जर्मन दार्शनिक (1880-1946—
“भगवद्-गीता.. शायद दुनिया की सबसे सुन्दर साहित्यिक कृति है।”

हम्बोल्ट, जर्मन दार्शनिक-शिक्षाविद—"सबसे सुन्दर और शायद दुनिया की किसी भी भाषा में रचित एकमात्र सच्चा दार्शनिक गीत...दुनिया द्वारा दिखाई जा सकने वाली संभवतः सबसे गहरी और सबसे ऊँची रचना।" 


महात्मा गाँधी—“जब मैं संशय से ग्रस्त होता हूँ, निराशा मुझे निहारती होती है, और मैं क्षितिज पर आशा की एक किरण भी नहीं देखता, तब मैं भगवद्-गीता की शरण में आता हूँ जिसके किसी एक श्लोक के आँचल में मुझे तसल्ली मिलती है, और तुरंत मेरे चेहरे पर अपार दुख के बीच भी मुस्कराहट प्रकट हो जाती है। जो भी भगवद्-गीता पर चिंतन-मनन करते हैं उन्हें प्रत्येक दिन इसमें नए आनंद और नए अर्थों की उपलब्धि होती है।"

महर्षि औरोबिन्दो घोष (1872–1950)—“भगवद्-गीता मानव जाति का एक सच्चा धर्म-ग्रंथ है। यह एक जीवंत रचना है न कि महज एक किताब, जिसमें हर युग और हर सभ्यता के लिए एक नया अर्थ है।" 

लार्ड वारेन हेस्टिंग्स, ब्रिटिश भारत के प्रथम गवर्नर जेनरल—"मुझे यह कहते हुए कोई संकोच नहीं है कि भगवद्-गीता में महान मौलिकता, विचारों की उदात्तता, विवेक-बुद्धि और शब्दावली है जिसका कोई सानी नहीं; यह दुनिया के सभी धर्मों के बीच एकमात्र  अपवाद-स्वरूप कृति है।" 


इमर्सन, अमरीकी दार्शनिक-लेखक—"भगवद्-गीता विचारों का एक साम्राज्य है, जिसकी दार्शनिक सीखों में श्रीकृष्ण एक ही साथ एकेश्वरवादीय सगुण परमेश्वर और उपनिषदीय निराकार ब्रह्म—इन दोनों के लक्षणों से संपन्न हैं।"  
 

The Gita has always been a great tool of human transformation. It is essentially a  philosophical work which teaches religious tolerance and promotes world peace. Let's have a look at the observations of some of the top intellectuals of the world on this great Book. These observations will also clarify why this book should be used in bringing about rapid human transformation in the villages for total village development at a faster pace. 

 

Albert Einstein: “When I read the Bhagavad-Gita and reflect upon how God created this universe everything else seems so superfluous.”

Aldus Huxley: “The Bhagavad-Gita is the most systematic statement of spiritual evolution of endowing value to mankind. It is one of the most clear and comprehensive summaries of perennial philosophy ever revealed; hence its enduring value is subject not only to India but to all of humanity.” - Aldous Huxley, British writer (1894-1963)

Henery David Thoreau: “In the morning I bathe my intellect in the stupendous and cosmogonal philosophy of the Bhagavad-Gita, in comparison with which our modern world and its literature seem puny and trivial.”

Hermann Hesse: “The marvel of the Bhagavad-Gita is its truly beautiful revelation of life’s wisdom which enables philosophy to blossom into religion” - Hermann Hesse, Nobel laureate German author and painter (1877-1962).

Hermann Graf Keyserling: “The Gita is..perhaps the most beautiful work of the literature of the world.” - Hermann Graf Keyserling (German Philosopher: 1880-1946) (The Bhagavad Gita and the West: The Esoteric Significance of the Bhagavad Gita and Its Relation to the Epistles of Paul”, by Rudolf Steiner, p. 43)

Wilhelm von Humboldt: “The most beautiful, perhaps the only true philosophical song existing in any known tongue ...perhaps the deepest and loftiest thing the world has to show.”- Wilhelm von Humboldt, German philosopher, educationist, linguist-1867-1935. (Source:  George Anastaplo (2002) - But Not Philosophy: Seven Introductions to Non-Western Thought, Lexington, p. 85.

Mahatma Gandhi: “When doubts haunt me, when disappointments stare me in the face, and I see not one ray of hope on the horizon, I turn to Bhagavad-Gita and find a verse to comfort me; and I immediately begin to smile in the midst of overwhelming sorrow. Those who meditate on the Gita will derive fresh joy and new meanings from it every day.” 

Aurobindo Ghosh (saga and philosopher): “The Bhagavad-Gita is a true scripture of the human race a living creation rather than a book, with a new message for every age and a new meaning for every civilization.” 

 Lord Warren Hastings: “I hesitate not to pronounce the Gita a performance of great originality, of sublimity of conception, reasoning and diction almost unequalled; and a single exception, amongst all the known religions of mankind” - Lord Warren Hastings, The first Governor-General of British India as cited in “India Discovered” - By John Keay, p 25

Emerson:  “The Bhagavad-Gita is an empire of thought and in its philosophical teachings Krishna has all the attributes of the full-fledged monotheistic deity and at the same time the attributes of the Upanisadic absolute.” - Emerson, the Americal philosopher and author.