सर्वधर्म गरीबी निवारण परिषद् 

All-Faith Council for Poverty Alleviation

भारतीय चेतना केंद्र यह अनुभव करता है कि लगभग सारे धार्मिक समुदायों के लोग दुनिया भर में आध्यात्मिक गरीबी के शिकार हैं. केंद्र ने यह भी पाया है कि भारत के लगभग सभी समुदायों के लोग, या उनका एक बड़ा हिस्सा, गंभीर आर्थिक गरीबी का भी शिकार है. कुछ खास धार्मिक समुदायों के लोग अधिक संख्या में और अधिक तीब्रता से गरीबी का दंश झेल रहें हैं. इस प्रकार की गरीबी मानवीय अस्तित्व को अर्थहीन बना देती है.

 

२) भारतीय चेतना केंद्र का यह विश्वास है कि भौतिकवाद और उपभोक्तावाद के साथ निरीश्वरवाद और संशयवाद के तेजी से प्रसारित होने के वावजूद धर्म आज भी एक बलवान ताकत है, और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आत्मघाती बिस्फोटों और जीवन के व्यापक विनाश ने, जो कई बार धर्म की भावना से प्रेरित रहते हैं, यह सिद्ध कर दिया है कि धर्म अभी भी एक महान प्रेरक शक्ति के रूप में मौजूद है. अब इस प्रेरणाशक्ति का प्रयोग किस दिशा में किया जाय यह हमारे ऊपर है - जीवन के विनाश के लिए या एक नए जीवन के निर्माण के लिए. यानी, मानवता को सकारात्मक कार्यो के लिए प्रेरित करने की दिशा में भी धर्म का उपयोग संभव है. गरीबी निवारण एक ऎसी ही सकरात्मक दिशा है.

 

३) उद्देश्य - आध्यात्मिक गरीबी के साथ-साथ आर्थिक गरीबी दूर करने के लिए केंद्र ने एक सर्वधर्म परिषद गठित करने का संकल्प लिया है. इस परिषद के निम्नलिखित उदेश्य होंगे-

  1. सुधी नागरिकों और सभी धर्मों के सकारात्मक चरित्र वाले ऐसे नेतृत्वकर्ताओं को एक मंच पर लाना, जो अपने-अपने समुदायों को उनकी आध्यात्मिक निर्धनता से मुक्त करने का प्रयास करें, जिसका तात्पर्यं यह है कि वे बाहरी कर्मकाण्ड, सामाजिक नियमों और अंधविश्वासों से हट कर  धर्म के माध्यम से मुख्य रूप से मनुष्यों में मानवीय मूल्यों को अंकुरित करें, और आत्मा की शुद्धि के माध्यम से मनुष्य को सम्बद्ध धर्म के सबसे ऊंचे लक्ष्य के लिए तैयार करें, जैसे निर्वाण (बुद्ध धर्म), जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति या मोक्ष (हिन्दू धर्म), स्वर्गारोहण (इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म).  

  2. न केवल अध्यात्मिक विकास, बल्कि  धर्मों की प्रेरणा-शक्ति का प्रयोग आर्थिक गरीबी दूर करने के लिए भी किया जाना, जो आज विभिन्न धार्मिक समुदायों के एक बड़े हिस्से को अपने में लपेटे हुए है, और जो भारत को दुनियां के गरीबों का सबसे बड़ा जमावड़ा बनाये हुए है.

  3. अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए मिलते-जुलते मगर अलग-अलग ऐसे संस्थानों का निर्माण करना जो धर्म और संस्कृति के विकास, ज्ञान के विकास, और गरीबी-निवारण की उपसंरचनाओं को समेकित कर एक साथ प्रस्तुत करें.

  4. अहिंसा, सभी धर्मों का आदर, धार्मिक सहिष्णुता, धार्मिक और सामाजिक सद्भावना तथा अमन और समृद्धि लाना.

 

4). संरचना - इस सर्वधर्म परिषद कि संरचना कुछ इस प्रकार से प्रस्तावित है-

  1. लगभग एक हजार लोगों की आमसभा

  2. लगभग 100  लोगों की एक राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद

  3. एक सात-सदस्यीय अध्यक्षीय मंडल (Presidium) जिसमें विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व हो.

 

5). भारतीय चेतना केंद्र ने धर्म-अध्यात्म-संस्कृति, गरीबी-निवारण और ज्ञानवर्धन का एक समेकित मॉडल गीताधाम के नाम से हिन्दुओं के लिए तैयार किया है. इसी तरह का एक समेकित मॉडल सभी अन्य धर्मों के लिए भी प्रस्तावित है, जिनके अनुयायी गरीबी से अधिक ग्रस्त हैं. मुसलमानों के लिए इसे इस्लामिक संस्कृतिक केंद्र, ईसाईयों के लिए ईसाई संस्कृतिक केंद्र और बौद्धों के लिए बौद्ध संस्कृतिक केंद्र का नाम फिलहाल दिया गया है. ये नाम व्यापक विचार-विमर्श के बाद संशोधित किये जा सकेंगे. गीताधाम का जो मॉडल तैयार किया गया है, जिससे मिलते-जुलते मॉडल दूसरे धर्मों के लिए तैयार करने की योजना है, इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में www.bharatiyachetna.org के मुखपृष्ठ पर देखा जा सकता है. उस मॉडल का एक अत्यंत संक्षेप फ्लायर संलग्न है.

FLYER OF THE GITA DHAM